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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुआ राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुआ राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम
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उन्नाव समाचार
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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुआ राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के अंतर्गत जूनोटिक कमेटी की वर्ष 2022 की प्रथम अंतर विभागीय बैठक का आयोजन

ब्यूरो
उन्नाव 22 जून 2022  जिलाधिकारी महोदय उन्नाव श्री रवींद्र कुमार की अध्यक्षता में राष्ट्रीय रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम के अंतर्गत जूनोटिक कमेटी की वर्ष 2022 की प्रथम अंतर विभागीय बैठक पन्नालाल हाल कलेक्ट्रेट उन्नाव में संपन्न हुई।
बैठक में डॉ विवेक गुप्ता द्वारा जूनोटिक बीमारी का संक्षिप्त विवरण ,संक्रमित कुत्ते ,बंदर बिल्ली आदि के काटने से होने वाली रेबीज बीमारी के,  लक्षण ,जांच ,उपचार का संक्षिप्त विवरण, रेबीज बीमारी से बचाव व रोकथाम हेतु रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत किया गया ,जिलाधिकारी महोदय द्वारा सभी विभागों को अंतर विभागीय रूप से समन्वय स्थापित कर जूनोटिक बीमारी से रोकथाम हेतु प्रयास करने व स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करने हेतु निर्देशित किया गया ।
जूनोटिक बीमारी जानवरों से आम आदमी में होने वाली बीमारियों को कहा जाता है जैसे रेबीज ,स्क्रब टायफस लेप्टोसिरोसिस, ग्लैंडर्स डिजीज। रेबीज बीमारी कुत्ते, बिल्ली, बंदर, सियार ,लोमड़ी ,भेड़िया या चमगादड़ के काटने से होती है  । प्राय : रेबीज बीमारी कुत्ते या बिल्ली या बंदर के काटने से होती है, पूरी दुनिया में प्रतिवर्ष लगभग 55000 व्यक्ति इस तरह से संक्रमित जानवरों के काटने से मृत्यु को प्राप्त हो जाते हैं, यह बीमारी संक्रमित जानवर के काटने या उसके नाखून से खुरची ने या कभी-कभी लार से भी होने की संभावना होने की  होती है कभी-कभी यह बीमारी संक्रमित पशुओं के मांस खाने से भी हो सकती है यह बीमारी चूहे के काटने से नहीं होती है ।रेबीज बीमारी का कोई भी  परंपरागत इलाज नहीं है केवल वैक्सीन से टीकाकरण ही इस बीमारी से बचा सकती है, रेबीज बीमारी से बचाव के लिए जनता में जागरूकता , शिक्षा तथा काटने से पहले टीकाकरण तथा काटने के बाद टीकाकरण तथा पालतू पशुओं का टीकाकरण और उनकी जनसंख्या नियंत्रण ही उपाय है, यदि किसी व्यक्ति को संक्रमित जानवर काटता है तो तुरंत उस घाव को साबुन से कम से कम 10 मिनट तक पानी से धोना चाहिए और उस पर कोई भी पट्टी ,कपड़ा या रुमाल नहीं बांधना चाहिए घाव को खुला छोड़ देना चाहिए ,।संक्रमित जानवर के काटते ही सर्वप्रथम चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए, साथ ही अपने घर में पालतू पशुओं का भी टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए । इसी प्रकार से स्क्रब टायफस बीमारी झाड़ियों में रहने वाले जंगली जानवरों से होती है । प्राय: यह बीमारी चूहों से फैलती है ',इससे बचाव हेतु घर के आस-पास झाड़ी या छोटे पौधों को नहीं होने देना चाहिए और होने पर कटवा देना चाहिए। लेप्टोसिरोसिस बीमारी भी झाड़ियों में रहने वाले चूहों से होती है इससे भी बचाव के लिए झाड़ियों का कटान करवा देना चाहिए।
बैठक में जूनोटिक कमेटी के सभी सदस्य व मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर सत्य प्रकाश व अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर आरके गौतम, डॉक्टर नरेंद्र सिंह, डॉ ललित सिंह ,डॉ जय राम सिंह, डॉक्टर हरिनंदन प्रसाद, व डॉक्टर विवेक गुप्ता ,जिला मलेरिया अधिकारी सहित जिले के अन्य अधिकारी मौजूद रहे।