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फर्जी पत्रकार बनकर दुराचार आरोपी को बचाने के नाम पर लिये 32 हजार रुपये

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फर्जी पत्रकार बनकर दुराचार आरोपी को बचाने के नाम पर लिये 32 हजार रुपये

खीरों (रायबरेली)- थाना क्षेत्र के गांव बलभद्रखेड़ा निवासी दुराचार के आरोपी एक युवक से दूसरे एक युवक ने जाल साजी करके खुद को पत्रकार बताकर और मुख्यमंत्री के साथ अपनी फोटो दुराचार के आरोपी युवक के परिजनों को दिखाकर पुलिस से बचाने के नाम पर 32 हजार रुपए ठग लिया ।  दुष्कर्म के आरोपी युवक को पुलिस द्वारा गिरफ्तार करने के बाद आरोपी के परिजनों ने तथाकथित पत्रकार से अपने पैसे वापस मांगे तो बदले में उसे धमकी मिली। दुराचार के आरोपी युवक के पिता ने तथाकथित पत्रकार के विरुद्ध थाने में प्रार्थना पत्र देकर मुकदमा दर्ज कर कराया है। खीरों पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
       बलभद्रखेड़ा निवासी रामकुमार ने खीरों थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया है कि बीते दिनों उन्नाव जिले के एक गांव की युवती ने मेरे बेटे आनंद पर दुराचार का आरोप लगाते हुए खीरों थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। एक जुलाई को मेरे बेटे की गोद भराई व बरीक्षा की रस्म अदायगी के दौरान पुलिस दुराचार के आरोपी आनंद को गिरफ्तार करने के लिए पहुंच गई । लेकिन आनंद भाग गया और पुलिस के हाथ नहीं लगा। इसी बीच बृजेश यादव नाम के एक युवक ने खुद को पत्रकार बताकर दुराचार के आरोपी आनन्द के परिजनों से संपर्क कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ अपनी फोटो दिखाकर बरगला लिया और दुराचार के आरोपी आनन्द को पुलिस से बचाने के नाम पर किस्तों में धोखाधड़ी कर 32 हजार रुपए हड़प लिए। साथ ही यह आश्वासन दिया कि तुम्हारे बेटे को मै पुलिस से बचा लूंगा। तथाकथित पत्रकार बृजेश यादव ने यह भी आश्वासन दिया कि मैं मुख्यमंत्री से पुलिस को फोन करा  दूंगा तो पुलिस कोई कार्यवाही नहीं करेगी। आठ जुलाई को मेरे बेटे आनंद की शादी होने के बाद नौ जुलाई को पुलिस ने आनंद को गिरफ्तार कर लिया। आनंद की गिरफ्तारी होने जाने के बाद रामकुमार ने पत्रकार बृजेश यादव को फोन कर बताया तो उसने राम कुमार को बताया कि मैं तुम्हारे बेटे को छुड़वा दूंगा लेकिन पैसे की व्यवस्था करो। जब राम कुमार ने अपना पहले दिया गया पैसा मांगा तो उसे धमकी मिलने लगी। थानाध्यक्ष देवेंद्र कुमार अवस्थी ने बताया कि पीड़ित की तहरीर के आधार पर नामजद आरोपी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।


रिपोर्ट रुस्तम यादव खीरों रायबरेली